Skip to content

Kalpant Praan Chikitsa Sadhana | कल्पान्त प्राण चिकित्सा साधना

Wishlist Share

About Course

कल्पान्त प्राण चिकित्सा साधना

Kalpant Praan Chikitsa Sadhana

जीवन शक्ति उपचार का प्राचीन विज्ञान
प्राण, श्वास-जागरूकता और पारंपरिक ऊर्जा-साधना को समझने की एक व्यवस्थित यात्रा।

कोर्स परिचय

भारतीय योगिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं में प्राण को जीवन से जुड़ी महत्वपूर्ण अवधारणा माना गया है। प्राण का संबंध श्वास, जीवंतता, सक्रियता और जीवन के अनुभव से जोड़ा जाता है। प्राणायाम, ध्यान और विभिन्न प्रकार की प्राण-साधनाओं के माध्यम से साधक अपने श्वास-अभ्यास, मानसिक सजगता और आंतरिक अनुभवों को समझने का प्रयास करता है।

कल्पान्त प्राण चिकित्सा साधना एक ऐसा प्रशिक्षण कोर्स है, जिसमें प्राण का स्वरूप, उसके स्रोत, पंचवायु, प्राण-साधना के सिद्धांत और पारंपरिक ऊर्जा-अभ्यासों का परिचय सरल एवं व्यवस्थित रूप से दिया जाता है।

इसका उद्देश्य साधकों को प्राण-संबंधी आध्यात्मिक अवधारणाओं को समझने, अभ्यास की तैयारी करने और ध्यान एवं श्वास-जागरूकता को दैनिक जीवन में शामिल करने में सहायता देना है।

प्राण क्या है?

भारतीय आध्यात्मिक साहित्य में प्राण को जीवन की मूल शक्ति के रूप में वर्णित किया गया है। उपनिषदों और योगिक परंपराओं में प्राण का वर्णन शरीर, इंद्रियों, मन और जीवन-प्रक्रियाओं से जुड़े विभिन्न संदर्भों में मिलता है।

प्राण-साधना में श्वास के प्रति सजगता, शरीर की अनुभूतियों का निरीक्षण, ध्यान और नियमित अभ्यास को महत्व दिया जाता है। इन अभ्यासों के माध्यम से व्यक्ति अपने अनुभवों, भावनाओं और मानसिक प्रतिक्रियाओं को अधिक ध्यानपूर्वक समझना सीख सकता है।

इस कोर्स में क्या-क्या शामिल है?

1. प्राण का स्वरूप एवं स्रोत
प्राण की पारंपरिक अवधारणा, जीवन में उसका महत्व और भारतीय योगिक दृष्टिकोण का परिचय।

2. पंचवायु का ज्ञान
प्राण, अपान, समान, उदान और व्यान—इन पाँच वायुओं की पारंपरिक अवधारणा तथा योगिक साहित्य में वर्णित उनके कार्यों का अध्ययन।

3. प्राण-साधना के सिद्धांत
अभ्यास की तैयारी, संकल्प, नियमितता, श्वास-जागरूकता और आत्म-अवलोकन की भूमिका।

4. प्राणायाम एवं श्वास-अभ्यास
सहज श्वास का निरीक्षण, श्वास के प्रति सजगता और सुरक्षित, सरल अभ्यासों का परिचय।

5. नाड़ी एवं आभा की पारंपरिक अवधारणाएँ
योगिक परंपराओं में नाड़ियों और आभा से संबंधित विचारों को समझना तथा उनसे जुड़े ध्यानात्मक अभ्यासों का परिचय।

6. प्राण-साधना एवं आत्म-अवलोकन
विचारों, भावनाओं और व्यवहार की प्रवृत्तियों को पहचानने तथा सजगता विकसित करने के अभ्यास।

7. स्वयं के कल्याण के लिए अभ्यास
विश्राम, श्वास-जागरूकता, ध्यान और संतुलित दिनचर्या जैसे सहायक अभ्यासों को समझना।

8. सेवा-भाव एवं सकारात्मक संकल्प
दूसरों के प्रति करुणा, सहयोग, सद्भाव और सकारात्मक व्यवहार को दैनिक जीवन में विकसित करने की दिशा में अभ्यास।

9. पारंपरिक ऊर्जा-अभ्यासों की सावधानियाँ
व्यक्तिगत अनुभवों को संतुलित दृष्टि से समझना, अभ्यास की सीमाओं को पहचानना और आवश्यकता पड़ने पर योग्य मार्गदर्शन लेना।

दैनिक जीवन में प्राण-साधना

प्राण-साधना का अभ्यास केवल ध्यान के समय तक सीमित न रखकर श्वास के प्रति सजगता, नियमित विश्राम, आत्मचिंतन और संतुलित दिनचर्या के साथ जोड़ा जा सकता है।

विद्यार्थियों के लिए ध्यानपूर्ण अध्ययन की आदत, व्यस्त पेशेवरों के लिए छोटे विश्राम-अभ्यास और सामान्य साधकों के लिए नियमित ध्यान एवं आत्म-अवलोकन उपयोगी अभ्यास हो सकते हैं। ये अभ्यास व्यक्तिगत अनुभव और परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग प्रभाव डाल सकते हैं।

बच्चों, परिवार या अन्य व्यक्तियों के व्यवहार में बदलाव लाने के लिए किसी ऊर्जा-अभ्यास को नियंत्रण के साधन के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जाता। इसके स्थान पर संवाद, संवेदनशीलता, सकारात्मक वातावरण और जिम्मेदार व्यवहार को महत्व दिया जाता है।

यह कोर्स किनके लिए है?

यह कोर्स उन व्यक्तियों के लिए उपयोगी हो सकता है, जो:

  • प्राण और पंचवायु की पारंपरिक अवधारणाओं को समझना चाहते हैं।

  • योग, प्राणायाम और ध्यान में रुचि रखते हैं।

  • श्वास-जागरूकता एवं आत्म-अवलोकन विकसित करना चाहते हैं।

  • भारतीय आध्यात्मिक एवं योगिक परंपराओं का अध्ययन करना चाहते हैं।

  • प्राण-साधना से संबंधित पारंपरिक अभ्यासों का व्यवस्थित परिचय चाहते हैं।

  • अपनी दैनिक दिनचर्या में ध्यान, विश्राम और सजगता को शामिल करना चाहते हैं।

महत्वपूर्ण सूचना

यह कोर्स आध्यात्मिक शिक्षा, योगिक परंपराओं और व्यक्तिगत अभ्यास के परिचय के लिए है। प्राण, नाड़ी और आभा से संबंधित पारंपरिक अवधारणाओं को स्थापित वैज्ञानिक निदान-पद्धतियों के समान नहीं समझना चाहिए। यह कोर्स किसी बीमारी की रोकथाम, निदान या उपचार की गारंटी नहीं देता और न ही योग्य चिकित्सा का विकल्प है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। श्वास-अभ्यास के दौरान चक्कर, असुविधा या घबराहट होने पर अभ्यास रोक दें और आवश्यकता के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लें।

Kalpant Divine Science — प्राण-जागरूकता, ध्यान, योग और आत्म-अन्वेषण की दिशा में एक आध्यात्मिक अध्ययन यात्रा।

Show More

What Will You Learn?

  • - **प्राण का स्वरूप एवं स्रोत:** प्राण की पारंपरिक अवधारणा और जीवन में उसके महत्व को समझना।
  • - **पंचवायु का ज्ञान:** प्राण, अपान, समान, उदान और व्यान की योगिक अवधारणाओं का परिचय।
  • - **प्राण-साधना के सिद्धांत:** साधना की तैयारी, संकल्प, अनुशासन और नियमित अभ्यास की विधि।
  • - **प्राणायाम एवं श्वास-जागरूकता:** सहज श्वास के निरीक्षण और सुरक्षित श्वास-अभ्यासों को समझना।
  • - **नाड़ी एवं आभा की अवधारणा:** भारतीय योगिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं में इनके महत्व का परिचय।
  • - **ध्यान एवं आत्म-अवलोकन:** अपने विचारों, भावनाओं और आंतरिक अनुभवों को सजगता से देखना।
  • - **स्वयं के कल्याण हेतु अभ्यास:** ध्यान, विश्राम और संतुलित दिनचर्या से जुड़े अभ्यासों को समझना।
  • - **सकारात्मक संकल्प एवं सेवा-भाव:** दैनिक जीवन में करुणा, सद्भाव और सकारात्मक व्यवहार को बढ़ावा देना।
  • - **दैनिक जीवन में प्राण-साधना:** व्यक्तिगत दिनचर्या में श्वास-जागरूकता, ध्यान और नियमित अभ्यास को शामिल करना।
  • - **सावधानियाँ एवं जिम्मेदार अभ्यास:** साधना के अनुभवों को संतुलित दृष्टि से समझना और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में विशेषज्ञ की सलाह का महत्व जानना।

Course Content

Kalpant Praan Chikitsa Sadhana | कल्पान्त प्राण चिकित्सा साधना PDF

  • Kalpant Praan Chikitsa Sadhana | कल्पान्त प्राण चिकित्सा साधना

Kalpant Praan Chikitsa Sadhana | कल्पान्त प्राण चिकित्सा साधना Video

Student Ratings & Reviews

No Review Yet
No Review Yet