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कल्पान्त-नवरात्रि उत्सव – चेतना के नौ द्वार (स्वामी जगतेश्वर आनंद)

Original price was: ₹551.00.Current price is: ₹51.00.

🌺 कल्पान्त नवरात्रि उत्सव-चेतना के नौ द्वार

स्वामी जगतेश्वर आनंद

नवरात्रि केवल देवी-पूजन, व्रत और उत्सव की परंपरा नहीं, बल्कि अपने भीतर उतरने, चेतना को शुद्ध करने और आत्मजागरण की ओर बढ़ने की नौ चरणों वाली आध्यात्मिक यात्रा भी है। पुस्तक नवरात्रि की नौ देवियों को साधक की आंतरिक शक्तियों और चेतना के विभिन्न आयामों से जोड़कर देखने का प्रयास करती है।

शैलपुत्री से महागौरी और सिद्धिदात्री तक प्रत्येक देवी साधक के भीतर किसी विशेष गुण, शक्ति और चेतना के जागरण का संकेत बनती है—स्थिरता, तप, एकाग्रता, साहस, करुणा, विवेक, भय से मुक्ति, शुद्धता और अंततः आत्मिक पूर्णता की ओर बढ़ती यात्रा।

यह पुस्तक आपको बाहरी देवी-आराधना से आगे ले जाकर उस दिव्य शक्ति की खोज की ओर आमंत्रित करती है जो स्वयं आपके भीतर विद्यमान है।

🌸 नौ रातें… नौ द्वार… चेतना की एक यात्रा…

अपने भीतर छिपी शक्ति को पहचानने और देवी को अपनी चेतना में अनुभव करने की एक आध्यात्मिक साधना।

ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे।
जय माता दी। 🙏

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Description

🌺“नवरात्रि उत्सव — चेतना के नौ द्वार

नवरात्रि का रहस्य — साधना, शक्ति और आत्मशुद्धि की नौ रातें

“नवरात्रि उत्सव — चेतना के नौ द्वार” एक ऐसी आध्यात्मिक यात्रा है, जिसमें माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की कथाओं को केवल धार्मिक दृष्टि से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक, दार्शनिक, मनोवैज्ञानिक और साधनात्मक दृष्टिकोण से समझने का प्रयास किया गया है।

यह पुस्तक नवरात्रि की नौ रातों को मूलाधार से सहस्रार तक चेतना के क्रमिक जागरण की यात्रा के रूप में प्रस्तुत करती है। माँ शैलपुत्री से आरंभ होकर माँ ब्रह्मचारिणी, चन्द्रघण्टा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री तक—प्रत्येक स्वरूप को साधक की आंतरिक चेतना के एक चरण, एक शक्ति और एक आध्यात्मिक संकेत से जोड़ा गया है।

इस पुस्तक में आपको प्रत्येक देवी की कथा, प्रतीकात्मक अर्थ, गुप्त आध्यात्मिक रहस्य, चक्र-संबंध और साधक की आंतरिक यात्रा को सरल एवं गहन भाषा में समझने का अवसर मिलेगा। यहाँ नवरात्रि केवल नौ दिनों तक चलने वाला पर्व नहीं, बल्कि मन की अशुद्धियों से मुक्ति, ऊर्जा के परिष्कार, आत्मबोध और अंततः पूर्ण चेतना की ओर बढ़ने का मार्ग बनकर सामने आती है।

उपवास, ध्यान, मंत्र, साधना, आत्मनिरीक्षण और देवी-आराधना के माध्यम से बाहरी पूजा से भीतर की यात्रा कैसे प्रारंभ होती है—इस पुस्तक का एक महत्वपूर्ण केंद्र यही है। नौ देवियों के प्रतीकों में छिपे संकेत साधक को स्वयं के भीतर झाँकने और यह अनुभव करने के लिए प्रेरित करते हैं कि जिस शक्ति की खोज वह बाहर कर रहा है, उसका स्रोत उसके अपने भीतर भी विद्यमान है।

✨ यह पुस्तक किसके लिए है?

यह पुस्तक उन सभी साधकों, आध्यात्मिक जिज्ञासुओं और पाठकों के लिए है जो नवरात्रि को केवल परंपरा के रूप में नहीं, बल्कि आत्मचेतना के जागरण की साधना के रूप में समझना चाहते हैं।

नौ रातें — नौ शक्तियाँ — नौ चेतना-द्वार — और एक संपूर्ण यात्रा…

मूलाधार से सहस्रार तक, शक्ति से चेतना तक और बाहरी देवी से भीतर की दिव्यता तक।

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